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||अनामिकाची अभंगवाणी|| (26 सप्टेंबर 1992)

लोकसेवेसाठी। होती आमदार। मंत्री नामदार। त्यांत थोडे 

मंत्र्यासी लाभतो। बंगला प्रशस्त। अंगणात गस्त। पोलिसांची 

लोकसेवेसाठी। होती आमदार। मंत्री नामदार। त्यांत थोडे 

मंत्र्यासी लाभतो। बंगला प्रशस्त। अंगणात गस्त। पोलिसांची 

दारामाजी उभी। राहते मोटर। जिच्या माथ्यावर। लाल दिवा 

सागराचे तिरी। टेकडीचे शिरी। मुकुटाचे परी। राजवाडा 

जयां आमदारा। नाही ऐसे सुख। जाणे त्यांचे दुःख। अनामिक...21

 

ज्यांना नाही जागा। मंत्रिमंडळात। त्यांना व्हावे प्राप्त। समाधान 

यास्तव निर्मिली। वेगळी कुरणे। खुशाल चरणे। त्यांत त्यांनी 

अलाणी समिती । फलाणे मंडळ | घालावा गोंधळ। हवा तैसा 

कासया सोडावी। सोनियाची संधी। हपापाची चंदी। गपापाला

खावोत बिचारे। आमदार सुखें। का रे पोट दुखे। अनामिका...22

 

एम्मेल्ले निवास । विधान भवन। पाहिजे भोजन। दर्जेदार 

देखरेखीसाठी। आहार समिती। तिला काम किती। मोजवेना 

दीर्घ यात्रेलागी। समिती निघाली। सिमला मनाली। काठमांडू 

कोठे कैसे खाणे। कोठे कैसे पिणे। याचा शोध घेणे। महाकर्म 

पर-उपकारा। राबतात थोर। व्यर्थ तुला घोर। अनामिका...2३

 

अनुसूचितांचे। साधाया कल्याण। समिती निर्माण। जाहलीसे 

मऱ्हाटभूमीत। दीन आदिवासी। अर्ध उपवासी। अर्धनंगे 

पूर्ण नग्नमूर्ती। कोणार्क पुरीला। म्हणौनी धरिला। तोचि मार्ग 

वाटेवरी आंध्र। पुढती बिहार। बौद्धांचे विहार। देखावे की 

अनामिका तुला। कैसा व्हावा बोध। अगा हाचि शोष। पीडितांचा... 24

 

स्वदेशापरीस। विदेश बरवा। चला रे ठरवा। शोधयात्रा 

आंग्लदेशा जावे। प्यारीस पहावे। जाऊन रहावे। जर्मनीला 

बर्फाळ प्रदेशी। ऊब अनुभवू। संस्कृती दाखवू। भारतीय 

विनोबा सांगती। विश्वबंधू व्हावे। कशाला रहावे। मागे मागे 

आनंदाचे यात्री। जाती पंचखंडीं। मरे ना पाखंडी। अनामिक...25

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